मेरे मोहब्बत भरे जीवन में ज़हर न घोलो ,
रिश्तों की पवित्रता में नफ़रत के रंग न घोलो।।
जो अपने हैं उन्हें सदा अपना ही रहने देना,
हर बात - बात में फ़ासलों का सफ़र न घोलो।।
लबों पर हो अगर शिकवा तो तहज़ीब भी रखना,
बातों के दरिया में कभी तुम तल्ख़ असर न घोलो।।
ये दिल तो काँच सा होता है, संभल कर रखना,
हँसते मुस्कराते हुए मेरे चेहरों में दर्द भर न घोलो।।
मिले हों प्यार से जो भी लोग इस सफ़र में तुम्हें,
उनकी वफ़ाओं में आज बेवजह कहर न घोलो।।
प्यार मोहब्बत से ही महकता है गुलशन-ए-जीवन,
इस खिलते हुए हरियाली मौसम में पतझर न घोलो।।
अगर बाँटना ही है तोअपनी अकीदत भरी दुआएँ बाँटो,
आज तुम अपनों की साँसों में कोई डर न घोलो।।
ये ज़िंदगी तो मात्र चार दिनों की मुस्कुराहट ही है,
आज यूँ ही मोहब्बत भरे जीवन में ज़हर न घोलो।।
- एम के सिंह