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अफसाना मोहब्बत का

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर एक दिल में बसा है अफ़साना मोहब्बत का,
        
                                                    
                            
नहीं मिटता कभी भी, ये ख़ज़ाना मोहब्बत का।।

नज़र से दिल तलक जो रास्ता चुपके से जाता है,
वहीं से तो शुरू होता है ये तराना मोहब्बत का।।

वफ़ाओं की ज़मीं पर सब्र के मोती उगाए हैं,
यही तो है उम्र भर का कारख़ाना मोहब्बत का।।

हवा नफ़रत की, लाखों बार आई बुझाने को,
मगर जलता रहा हरदम दिया-सा मोहब्बत का।।

न दौलत जीत पाती है ,न शोहरत हार सकती है,
अलग ही है जहाँ में आब-ओ-दाना मोहब्बत का।।

कभी आँसू, कभी हँसी, कभी ख़ामोश आहों में,
यही तो है सदा से ताना - बाना मोहब्बत का।।

जिसे दुनिया ने ठुकराया, उसे सीने से लगाया,
यही होता रहा सदियों से शाना मोहब्बत का।।

नफ़रत की आँधियाँ भी रास्ता उसका न रोक सकीं,
बहुत ऊँचा रहा हर दौर में परचम मोहब्बत का।।

'एमके. सिंह' लिखो ऐसे कि ,दिल आवाज़ देने लगे,
यही है शायरों का ख़ूबसूरत अफ़साना मोहब्बत का।।

 
2 महीने पहले
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