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अब इश्क़ मेरा सज्दा है

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरसों से तेरी तलाश थी, आज मुझे तुम मिल ही गई"
        
                                                    
                            
सूनी पड़ी इस ज़िंदगी को जीने की वजह मिल ही गई।।

हर मोड़ पर ठोकर खाई, हर ख़्वाब बिखरता देखा,
तेरी वफ़ा की छाँव मिली, किस्मत भी सँवर ही गई।।

सदियों से जो दिल वीराना था,दर्द जहाँ का पहरा था,
तेरी हँसी की एक किरन से हर शाम निखर ही गई।।

सज्दों में जिसे माँगा था, अश्कों से जिसे सींचा था,
रब करम -निगाही देखो, मेरी दुआ असर ही गई।।

तन्हाई ने जो ज़ख्म दिए, दुनिया ने जो इल्ज़ाम दिए,
तेरे लबों की मुस्कान मिली, हर टीस बिखर ही गई।।

अब चाँद भी फीका लगता है,फूल भी कम महकते हैं,
तेरे हुस्न की रौशनी से आज हर महफ़िल संवर ही गई।।

दौलत न मिली तो क्या ग़म, शोहरत भी रही बेअसर,
तेरी मोहब्बत मिलते ही , हर चाह मुकम्मल हो गई।।

अब डर नहीं बिछड़ने का, फ़िक्र नहीं दुनिया की,
तेरे भरोसे की खुशबू से हर उलझन गुज़र ही गई।।

अब इश्क़ मेरा सज्दा है, अब इश्क़ ही मेरी बंदगी है,
बरसों से तेरी तलाश थी, आज मुझे तुम मिल ही गई।।

 
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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