जब दिल ही दिल में इरादें बुलंद कर लिया,
अपने ही हक़ में जहाँ, रजामंद कर लिया।
जो रूठकर चले गए, वो आ ही जाएंगे,
उनकी हरेक मिज़ाज को, पसंद कर लिया।
न्याय की पुकार कितना खतरनाक है,
न्यायधीश स्वयं को ही, बंद कर लिया।
स्वयं की राह से ही इतना प्यार हो गया,
दरिया ने अपने आप को, समंद कर लिया।
औरों के गम को धोते- धोते हार जब गया,
स्वयं को घर में बैठ, शाहीनंद कर लिया।।