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कैसे चुकाओगे

Manoj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक पेड़ लगाकर तुमने, किसी पर एहसान नहीं किया
        
                                                    
                            
बताओ,परींदों के गीत का कर्ज, तुम कैसे चुकाओगे?

मखमली,कोमल, रेशमी,मन को सुकून देने वाली,
शीतल छांव के प्रीत का कर्ज,तुम कैसे चुकाओगे?

डालियों में बंध जाते हैं, भीगते झूले जो सावन की,
पावस की मीठी गीत का कर्ज,तुम कैसे चुकाओगे!

मिलती रहती है सदा रहेगी, पीढ़ियों से पीढ़ियों तक,
सांसों को शुद्ध समीर का कर्ज,तुम कैसे चुकाओगे!

धरती की बंजरता को,रोका जड़ों से जकड़ जकड़कर,
हरियाली से फैली संगीत का कर्ज, तुम कैसे चुकाओगे!
3 महीने पहले
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