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इश्क में हारकर

Manoj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अरे! इश्क में हारकर भी, कोई, हारता थोड़ी है!
        
                                                    
                            
जिंदगी को जीने वाला, खुद को, मारता थोड़ी है!

तानों के कांटे,भले,छलनी कर दे दिल को,पर,
सहने वाला, सारे ज़ख्मों को,निहारता थोड़ी है!

साहिल टूटे और पांव दरिया में जा गिरे, तो,
डूबने वाला, जहां को, पुकारता थोड़ी है!

गम, मायूसी,तड़प, बेचैनी,सब हमसफ़र हैं,
इनके बिना जिंदगी, कोई, गुज़ारता थोड़ी है!

एक तूफान, सबके भीतर, घूमते ही रहता है,
जिसके चक्कर से वो खुद को,उबारता थोड़ी है!
3 महीने पहले
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