विज्ञापन

ठीक -ठीक झांको अपने, गिरेबान में!!

Manoj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक दिन उड़ना है तूझे, आसमान में,
        
                                                    
                            
पंखों को संवारो अभी, अपने मकान में!

जिस दिन तलब लगेगी तूझे, जद्दोजहद का,
थकने लगोगे बैठकर, ऐशोआराम में!

सागर में कौन जाने, कितने रत्न हैं भरे,
गोते लगाना सीख लो, आंधी तूफान में!

युद्ध के मैदान में ,जाना है वीर- सा,
रखना धार करके, तलवार म्यान में!

खामी बहुत है आज भी "समदिल" तुम्हारे में,
ठीक -ठीक झांको अपने, गिरेबान में!!
16 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7504 कविताएं

View Profile