आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ठीक -ठीक झांको अपने, गिरेबान में!!

                
                                                         
                            एक दिन उड़ना है तूझे, आसमान में,
                                                                 
                            
पंखों को संवारो अभी, अपने मकान में!

जिस दिन तलब लगेगी तूझे, जद्दोजहद का,
थकने लगोगे बैठकर, ऐशोआराम में!

सागर में कौन जाने, कितने रत्न हैं भरे,
गोते लगाना सीख लो, आंधी तूफान में!

युद्ध के मैदान में ,जाना है वीर- सा,
रखना धार करके, तलवार म्यान में!

खामी बहुत है आज भी "समदिल" तुम्हारे में,
ठीक -ठीक झांको अपने, गिरेबान में!!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
15 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर