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बन प्यार का पंछी

Manoj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बारिश के मौसम में, जब पास आऊंगा,
        
                                                    
                            
मौसम के बारिश का, एहसास कराऊंगा।

बूंदों की ठंडक में, यादों की गर्मी हो,
मखमल- कोमल सी, मधुमास लाऊंगा।

फगुआ के अबीर, तेरे गालों को छेड़ेंगे,
रंग में ऐसा भंग, बिंदास मिलाऊंगा।

टेर पपीहे की, संगीत सा महके,
सांसों में खुशबू की, इक प्यास जगाऊंगा।

जब जब पौंतलियों में, यादों की खुजली हो,
बन प्यार का पंछी, तेरे पास आऊंगा।
एक महीने पहले
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