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खुशियों के मेले लगते हैं कागज़ की नावें चलती हैं

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सावन में झूले डलते हैं
        
                                                    
                            
आम दशहरी खूब फलते हैं
यादों के शहर में आज भी
खुशियों के मेले लगते हैं

कागज़ की नावें चलती हैं
ठंडी छतें रातभर जगती हैं
यादों के शहर में आज भी
बचपन के नगमे बजते हैं।
-मं शर्मा
7 घंटे पहले
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