सावन में झूले डलते हैं
आम दशहरी खूब फलते हैं
यादों के शहर में आज भी
खुशियों के मेले लगते हैं
कागज़ की नावें चलती हैं
ठंडी छतें रातभर जगती हैं
यादों के शहर में आज भी
बचपन के नगमे बजते हैं।
-मं शर्मा