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साँझ ढले

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीवन उगता प्रभात था
        
                                                    
                            
अपेक्षाओं का दबाव था
जीवन की जब साँझ ढली
खला न कोई अभाव था ।
-मं शर्मा 
2 महीने पहले
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