समय की पाजेब में
लम्हों के घुँघरू हैं
रूनझुन की धुन पे
नाच रहा जीवन है
बिखर गए कुछ लम्हे
जीवन से छिटक कर
सहेज उन लम्हों को
सौगात समझकर।
-मं शर्मा