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मोह बंधन

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ सुलझे कुछ उलझाए से
        
                                                    
                            
रेशम की तरह नरमाए से
बड़े नेह से बाँधे तुम संग
मोह से मोह के धागे थे

क्यों भावनाओं से खेल गए
मन नेह-नीर से भीग गए
कच्चे धागे कच्चे पड़ कर
मोह बंधन से छूट गए ।
-मं शर्मा
12 घंटे पहले
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