यहाँ वहाँ हर जगह
देखता हूँ जहाँ जहाँ
हर तरफ फैल रहा
काला काला सा धुआँ
साँसें हैं सिसक रहीं
सिहर रहा रूआँ रूआँ
जीने को विवश जीवन
पीछे खाई आगे कुआँ।
-मं शर्मा