जी का जंजाल कभी
सुख से मालामाल था
समय का हर कालखंड
जीवन से बेहाल था
ममता का मोहजाल कभी
तृष्णा का जाल था
तृप्ति का बोध बना
एकमात्र ढाल था।
-मं शर्मा