एक चितेरा बैठा
दूर कहीं
गढ़ रहा है
रचनाएँ नित नई
चहुँ ओर से
उठ रही आवाज है
हरेक दिशा इस
बात की गवाह है
ये कौन चित्रकार है ।
मं शर्मा (रज़ा)