विज्ञापन

आलीशान इमारत था कभी

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आलीशान इमारत था कभी
        
                                                    
                            
आज ढहती दीवार हूँ
अस्तित्व फिरभी रहेगा मेरा
चाहे रेत में तब्दील रहूँ।
-मं शर्मा 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile