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रेत की सिलवटें

Manju Jakhar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त की लालटेन थे , जुगनुओं का तकाजा रहे
        
                                                    
                            
रेत की सिलवटों में मकाम सबसे ज्यादा रहे
नाप ना सकोगे हैसियत हमारी
ना हम कम थे ना शून्य से कभी ज्यादा रहे

ना हम कबीर थे , ना कभी ख्वाजा रहे
ना ही हम रंक थे और ना राजा रहे
नाप ना सकोगे खुद्दारी हमारी
ना शतरंज की चाल थे, ना कभी प्यादा रहे

मंजिल के ज्ञाता न थे , सफर में ज्यादा रहे
शोर के आदी न थे , एकांत में जिंदा रहे
नाप ना सकोगे किरदारी हमारी
हँसते हुए निकल गए और दर्द में ज्यादा रहे
--मंजू
3 घंटे पहले
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