आंखों में तुम्हारी देखकर,
मेरे हमसफर ।
चले पड़े थे हम कुछ सोचकर ,
पति संग जीवन पथ निभाएंगे ।
एक प्यार की बगिया,
अपनी बनाएंगे ।
अक्सर दूर होती है मंजिले ,
पर फिर भी करीब लाएंगे उन्हें ।
या खुद ही कोशिश करेंगे ,
उन सपनों को पूरा करने की ,
जो देखेंगे हम दोनों मिलकर ।
जो भरे हैं हमारी आंखों में ,
सागर की तरह ।
जिसमें है उम्मीद,
आरजू और कुछ हसीन सपनो की ,
सुंदर तस्वीर....
जिन्हें लेकर हम खुश हैं ।
इनके साथ चल पड़ेंगे ,
हम प्यार भरी कश्ती लेकर ,
सागर पास ,
अपनी मंजिल तक ।
जिसमें है हमारी ,
जिंदगी की आकर्षक तस्वीर ।
जो हम देख रहे हैं ,
एक दूसरे की आंखों में ।
हम अपनी इस कश्ती को ,
जिंदगी रूपी सागर से ,
खुशियां चुनने को कहेंगे ।
हम खुश रहेंगे ,
उन हसीन पलों को देख कर ,
जो सिर्फ हम दोनों के ही होंगे ।
और चल पड़े हम,
तुम्हारी तस्वीर ,
अपने दिल में लेकर ।
स्वरचित रचना
मंजू चौहान
हरिद्वार
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