मेरे पापा ,
आप बहुत याद आते हो ।
याद जब आपकी आती है,
हमअन्दर ही अन्दर रो लेते है, अपने आँसुओं को ,
सबसे छिपा लेते हैं ।
जब रात अंधेरी आती है ,
आपकी याद ,
पापा बहुत मुझे आती है ।
मन में खुशी की लहर हो या ,
दुख की कोई लहर ,
ढूंढती है मेरी आँखें ,
सिर्फ आपको ।
दिखते कभी नहीं,
बस आंसू आ जाते हैं ,
मेरी इन आँखों में ।
तब सिर्फ ,
आसमान में दिखाई आप देते हो याद वो सभी पल आते हैं ,
जब आपके सामने ,
मैं बेफिक्र होकर इस दुनिया में , रहती थी ।
जो भी मेरे मन में आता ,
करती वही थी ।
क्योंकि,
आपका साया था ,मेरे सर पर और हमेशा ध्यान रखोगे मेरा । आज जब सोचती हूं ,
उन पलों को ,
तब सिर्फ पापा ,
आप याद बहुत आते हो I
मुझे याद है वो सारे ,
आपके साथ बिताए हुए क्षण । एक सूट मांगती थी ,
आप चार लाकर देते थे ।
मेरे एक समोसे की मांग के साथ , रसगुल्ले -बर्फी अलग से लाते थे ।
आप चुपके से ,
रसोई में लाकर रख देते थे ।
फिर कहते थे ,
बच्चो जाओ ,देखकर आओ ,
कुछ रखा हुआ है क्या रसोई में ? आपके वो ग्यारह साल ,
जब आप बीमार हुए ,
छिन गए वो हमारे सुख के क्षण , मम्मी व भाई सबके चेहरों पर थे, बस चिंता के भाव ।
पर आप खाट पर लेटे हुए भी , मुस्करा देते थे ।
और आपकी आंखें कहतीं कि , बच्चो चिंता मत करो ।
अभी तो मैं हूं तुम्हारे लिए ।
आज भी वो चेहरा याद आता है ।
जब कोई मुश्किल आती है ,
बस सोचती हूं ,
कि काश ! आप बीमार न होते , तो आप हमारे पास होते ।
सच में पापा
आपकी बहुत कमी लगती है ।यदि आप होते तो कुछ भी ,
मैं मांग लेती आप से ।
क्योंकि जानती हूं कि आप ,
कभी मुझे मना नहीं करते।
अपने आप समझ जाते मेरे मन की बात ।
मन यही सोचा करता है,
आप क्यों चले गए पापा ?
हमे ,इतनी जल्दी छोड़कर ..
जब जाती है नजर ,
आसमान के सितारों पर ,
तब पापा सच मे ,
आपकी बहुत याद आती है ।
- मंजू चौहान
हरिद्वार
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