विज्ञापन

मेरा पुराना घर

Manju Anand

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरा पुराना घर,
        
                                                    
                            
देखा उसे तो बदला-बदला सा लगा,
नया-नया, कुछ अलग सा लगा।
आँगन के पौधे बदले हुए थे,
घर का रूप-रंग बदल गया था।
मेरा गुलाबी घर अब सफ़ेद रंग ओढ़े हुए था।
अब वो मेरा घर नहीं था,
फिर भी दिल कह रहा था,
मेरा घर बदल गया है।
हाथ जोड़ प्रणाम कर,
जी भरकर अपने पुराने घर को देखा।
जैसे हर दीवार, हर कोना
मुझे पहचान गया हो,
कह रहा हो,
"भीतर आओ न।"
कुछ यादें वहीं ठहर गईं,
कुछ साथ मेरे चल पड़ीं।
नम आँखों से निहारकर
लौट चले मेरे कदम
अपने नए घर की ओर।
मेरा पुराना घर।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all