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किसी ने हमको चाहा ही नहीं

Manish Yadav

Mere Alfaz
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                            किसी को छिछला पसंद आया
        
                                                    
                            
किसी को उन्माद पसंद आया

किसी को गहरा पसंद आया
किसी तो ठहरा पसंद आया

किसी को शब रास आयी
कोई सहर पे है लुटा

किसी ने चाशनी को चुना
कोई ज़हर पे मर मिटा

किसी ने समझा नही
कोई समझना चाहा नही

किसी को हमने चाहा
किसी ने हमको चाहा ही नही

- मनीष यादव
3 वर्ष पहले
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