विज्ञापन

ख्वाहिश

Mamta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख्वाहिश थी जिसे पाने की, मुद्दतों से
        
                                                    
                            
वो मेरी आंखों की तमन्ना होकर रह गई।
कुछ इस तरह छोड़ी उन्होंने महोबब्त की छाप मेरी तकदीर के पन्नो पर
की मेरी किताब की कहानी कहीं बदल कर रह गई।
ये देख , कहीं दूर खड़ा एक शख्स मुझे कब से निहार रहा था
और वहीं दूर खड़े होकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था।
शायद ये वो शख्स था, जो इस डूबते हुए को सहारा देना चाह रहा था।
पर में तो बस एक लेखक हूं,
जो अपने ही शब्दों में किसी पाना चाह रहा था।।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kamal jha

90 कविताएं

View Profile