विज्ञापन

यादों की तिजोरी: कविता

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कवि के सांसों में बसती है
        
                                                    
                            
"कविता"
कवि के यादों की तिजोरी है
"कविता"
सुर्ख चांदनी में बन जाए
"कविता"
हवा के झोंकों में सिमट जाए
"कविता"
अधरो पर आकर बैठ जाए
"कविता"
घटा में बहार बन छा जाए
"कविता"
ख्यालों के चमन महका जाए
"कविता"
फूलों में जैसे ताजगी आ जाए
"कविता"
बहुत खूबसूरत एहसास है
"कविता"
बादल को घिरते देखा तो याद आई
"कविता"
सागर की लहरों जैसे प्रवाह बन जाए
"कविता"
धारा में बहता हलचल आवाज बन जाए
"कविता"
मोती जैसे खान से चुराई हो खजाना बन जाए
"कविता"
होठों की मधुर आवाज बन गीत गुनगुनाए
"कविता"
मस्ती में रवानगी बन रंगत दे जाए
"कविता"
पूजा में आरती बन संपूर्ण कर जाए
"कविता"
कवि के रूह की आवाज है
"कविता"
जीने की अरमान है
"कविता"
साज और श्रृंगार है
"कविता"
मन का उल्लास और प्रकाश है
"कविता"
धड़कन और जान है
"कविता"
पूरा जहान है
"कविता"
-ममता तिवारी
4 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all