होता नहीं प्रेम यूं ही
यह तो दिल का रिश्ता होता
यूं ही नहीं कोई किसी के
दिल का फरिश्ता होता
प्रेम तो बस प्रेम है........
इसमें न कोई मिलावट होता
प्रेम तो शुद्ध सच्चा
और शाश्वत होता..........
ढाई अक्षर प्रेम के जैसा पावन
न कोई शब्द न कोई लिखावट होता
प्रेम तो चेहरे से ऊपर
रूह का दर्पण होता..........
प्रेम के बिना जीवन क्या जीवन होता
एहसासों से डोर बंधी प्रेम की
प्रेम ही प्रेम का उपवन होता
नजर से नजाकत तक
दिल से धड़कन तक........…
प्रेम पर प्रेम का ही बस चलता
ईश्वर ने भी माना प्रेम को
प्रेम को जिया.....................
यूं ही नहीं पार्वती जी ने
महल को त्याग दिया............
कृष्ण जी ने बजाकर मधुर प्रेम ध्वनि
राधा जी के दिल को धड़का दिया..…
प्रेम को ईश्वर ने भी शिद्दत से जिया..।।
-ममता तिवारी