रावण के पुतले के साथ-साथ
अगर मन में बैठे रावण को भी
जलाने की प्रथा होती
तो आज हमारे देश की
बेहद खूबसूरत दशा होती
हर साल पुतला फूंक कर
हम जश्न तो मनाते हैं
काश! भीतर के रावण को भी
जलाने का नियम होता
जल जाता अहंकार
लालच नफ़रत का पुतला तो
आज हमारे देश का नज़ारा
कुछ और ही हसीन होता
मन में बैठे रावण को
जलाने का दस्तूर होता तो
हर तरफ खुशहाली होती
और सबके चेहरों पर नूर होता।।
-ममता तिवारी