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किताबों से लगाव: कविता

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किताबों से लगाव गहरा है।
        
                                                    
                            
किताबों का दिल पर पहरा है।।
यही सबसे अच्छी सहारा है।
यही धन, दौलत हमारा है।।
हमेशा सहायक बन जाती है।
लगता इसको मेरी परवाह ज्यादा है।।
मेरी तरफ खूबसूरती से देखती है।
शायद इसको मुझसे कुछ कहनी है।।
इसको मेरे करीब रहना है।
मुझे भी कहां इससे दूर जाना है।।
मेरे दिल,धड़कन सांसों में बसी है।
यही मेरे खुशी और चेहरे की हंसी है।।
इसकी कशिश मुझे अपने तरफ खींचती है।
यही मेरी हमदम और हमनशीं है।।
एक पल नजरों से ओझल नहीं होती है।
दिल, दिमाग पर इसकी राज चलती है।।
इसकी मीठी बाते मुझे सारे जग से न्यारी लगती है।
मेज पर बैठी रहती, मेरी राह तकती है।।
बैठ जाऊं पास मै ख़ुशी से उछल उठती है।
पता नहीं? कौन सा रिश्ता है।
मुझे तो फरिश्ता लगती है।।
-ममता तिवारी
7 महीने पहले
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