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जब मै छोटी थी

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चंचल चुलबुल थोड़ी नटखट,
        
                                                    
                            
बहुत शरारत मै करती थी।
उन्मुक्त गगन की सैर,
पंछी बन कर लेती थी।
नहीं किसी का रोक था,
नहीं किसी का रोब था।
मन में कई सपने थे,
पूरा करने का होड़ था।
अपने दम पर नए-नए
सपनों की इमारत,
खड़ी कर लेती थी।
बहुत स्वच्छंद बहती थी,
जब मैं छोटी थी।
हर दम चहकती महकती,
इठलाती रहती थी।
पल में लोगों के मायूसी हटाऊ,
इतनी खुशियों बिखेरती थी।
उदासी किसी की भांति न थी,
नहीं उदास मै होती थी।
पैसों की जरूरत न थी,
हंसी से ही हंसी खरीद लेती थी।
चहल पहल घर आंगन,
जगमग जगमग करती थी।
अपनी हरकतों से,
सब में उमंग भर देती थी।
चेहरे से थोड़ी भोली भाली,
बड़े बड़ों के छक्के छुड़ाती थी।
कहां में डरती थी,जब मैं छोटी थी।
चंचल चुलबुल थोड़ी नटखट
बड़ी शरारत मैं करती थी
सबका मन हर्षाती थी,
जब मैं बहुत छोटी थी।
बहुत हसमुख थोड़ी हठी,
बहुत मन को भाती थी,
जब मै छोटी थी।
8 महीने पहले
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