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चाहा नहीं कुछ भी आपको चाहने के बाद

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आंख खुली तो आप दिखीं,
        
                                                    
                            
आंखें बंद हुई तो आप दिखीं।
देखा नहीं मां आपके सिवा,
आपके जितना मेरा कोई फिक्र किया।

सांसे आपकी बदौलत चली,
निष्प्राण में आपने प्राण भरी।
पल-पल अपने निगरानी में की बड़ी,
आपने कितने कितने व्यथाएं सही।

चुका ना सकूंगी कर्ज आपका,
आपने खुशियों से नवाजा,
पत्थर की मूरत को तराशा।
आपसे मिला ज्ञान और जिज्ञासा,

सोचती हूं, ईश्वर के कितने एहसान मुझ पर,
मिली आप मुझे वरदान बनकर।
थाम लेती आप हाथ आगे बढ़कर,
कितनी बार में उठ खड़ी हुई गिरकर।

आपके हाथों में हाथ मेरा,
फिर जख्मो से डर कैसा।

आप मरहम बन जाती
ईश्वर की महिमा निराली,
इसीलिए ,ईश्वर ने
मां के हाथों में जिम्मेदारी दे डाली।

आप जितनी अच्छी तरह संभालती,
ईश्वर के बस की बात नहीं,
ईश्वर ने हार मानकर,
मां नाम की मूरतगढ़ी।

बेफिक्र हो गए भगवान,
मां ने अपने हाथों में ली कमान।
मां में गुण, गजब, करती नहीं कभी अभिमान,
इसीलिए , मां में बसते भगवान।

भले दुनिया जाए हार,
मां कभी नहीं मानती हार।

मैंने देखे ईश्वर के चमत्कार ये मेरा सौभाग्य,
आपको दिए धरती पर उतार,
आप मेरा सबसे बड़ा उपहार
आपका चाहिए आजीवन दुलार।

भगवान से यही पुकार,
मिलता रहे मां का प्यार।

नहीं चाहिए मुझे धन और दौलत,
नहीं चाहिए कीमती हार।

देखा नहीं मां कुछ भी,
आपको देखने के बाद।

चाहा नहीं कुछ भी,
आपको चाहने के बाद।

आपने दिए बहुत अच्छे,
संस्कार।

सुख दुख सब एक समान,
आपको दिल से अभिनंदन।
- ममता तिवारी
8 महीने पहले
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