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स्त्री

Mamta Patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे सखि ! तुम जो यह आईना देखकर इतराती हो...
        
                                                    
                            
आईने में यूं मुस्कुराती हो...

तुमने जो यह मुखौटा पहना है क्या वो सही है ?
दुनिया से तुम नजरें चुराती हो...
अपनी सच्चाई को तुम किससे छुपाती हो?

जरा पूछो उस आईने में ख़ुद से क्यों तुम इस धरती पर आई हो..
पहचान लो खुद को खोने से पहले।
बचा लो उस स्त्री को जो तुम्हारे अंदर है।
2 वर्ष पहले
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