वह एक इंसान है जो गरीब कहलाता है,
दो वक्त की रोटी के लिए दिन रात पसीने बहाता है,
बड़े-बड़े लोगों को अपना खुबसूरत समय देता है,
लेकिन फिर भी वो इंसान गरीब कहलाता है
क्या वो सच में गरीब है? या उन्होंने उसे गरीब बनाया है
क्या वो सच में गरीब है? या उन्होंने उसे गरीब बनाया है
जो खुद तो महलों में रहते हैं, पर इन्हें झोपड़ी का रास्ता दिखाया है।