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क्या वो सच में गरीब है?

                
                                                         
                            
वह एक इंसान है जो गरीब कहलाता है,
दो वक्त की रोटी के लिए दिन रात पसीने बहाता है,
बड़े-बड़े लोगों को अपना खुबसूरत समय देता है,
लेकिन फिर भी वो इंसान गरीब कहलाता है
क्या वो सच में गरीब है? या उन्होंने उसे गरीब बनाया है
क्या वो सच में गरीब है? या उन्होंने उसे गरीब बनाया है
जो खुद तो महलों में रहते हैं, पर इन्हें झोपड़ी का रास्ता दिखाया है। 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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