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तेरे नाम की

Mamta Kanaujia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            
दो भीगे शब्दों में लिखी
कविता तुम्हारे नाम की
गीली स्याही से सूखे पन्नों पर
प्यार भरी पाती तुम्हारे नाम की।

नैनों ने पढ़ ली थी नैनों की भाषा
कुछ था शायद तुम को भी
प्यार जरा सा
लेकिन मैंने तो वफ़ा-ए-जिंदगी
तेरे नाम की।

भीगा सा ये तन मेरा
तेरी याद में डूबा यह मन मेरा
यादों की कश्ती तेरे नाम की।

जिन गीली राहों को चुनकर
हम तुम साथ चला करते थे जिनपर
उन भीगे पैरों की मंजिल
तेरे नाम की।

अधरो की वो मीठी-मीठी बातें
मिलने बिछड़ने की सिहरन भरी यादें
वर्षा ऋतु की रिमझिम फुहार में
दो भीगे शब्दों की पुरवाई
तेरे नाम की।

नहीं चाहिए था तन तेरा
बस चाहा था इक मन तेरा
महफूज़ रहे तू हर बला से
इतनी सी इबादत ख़ुदा से
तेरे नाम की।

- ममता कनौजिया
2 वर्ष पहले
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