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बयां ए जिंदगी

Mamta Kanaujia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐ जिन्दगी तू कितना मुझे सतायेगी
        
                                                    
                            
लगता है संघर्ष करते करते
तू यूं ही गुजर जाएगी
बस तुझसे चाहिए कुछ खुशी के पल
नही पता कैसा होगा आने वाला कल
हसरतें है तुझसे क्या वो पूरी हो पाएगी
चाहत में तेरी शायद वो अधूरी रह जाएगी
दो पल की तेरी कहानी है
तेरा साथ है कुछ दूर का
फिर खत्म कहानी है
हंसने खिलखिलाने का कुछ हिस्सा देदे
फिर ना आने वाला दिन
और ना ही रात सुहानी है
मैंने तुमसे गुजारिशों का अंबार लगाया है
पर तूने मेरी उलझनो को कहां सुलझाया है
कभी तो मुझसे इश्क कर ले लगाले गले मौत से पहले
जरा रश्क करले
सताना छोड़ मत बन अंजान तू कहां रह रही है खुशियों के साथ बस इतना पता दे
माना कि मैं तेरी चाहत में नहीं हूं शामिल
कब बदलेगी मेरे लिए इतना बता दें।
-ममता कनौजिया
2 वर्ष पहले
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