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यूँही जाना तेरा

Mamta Goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाहा था रोकना तुम्हें
        
                                                    
                            
जब चल दिए थे रुठ के।
सोचा था मना लूंगी तुम्हें,
आखिर हो तो मेरे अपने ही।
मगर हैरान हूँ अब ये देख के
तुम नाराज़ ना थे,
बल्कि किसी मौके की तलाश में थे ।
दूर गए तो थे उस दिन मुझसे मगर
छोड़ तो बहुत पहले ही गए थे
2 वर्ष पहले
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Shivam Awasthi

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