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"खामोश तबाही"

malti gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह मित्र है या शत्रु, मुझे ज्ञात नहीं,
        
                                                    
                            
हित कर रहा या अहित, इसका भान नहीं।
बस डरती हूँ स्वयं के ही रौद्र रूप से,
क्योंकि जो होगा परिणाम, उसे उसका ज्ञान नहीं।
वह खेल रहा है आग से, उसे समझाए कौन,
टूटेगा जब मेरा सब्र, तब छाएगा मौन।
विनाश की उस कगार पर वो पछताएगा,
जब मेरे भीतर का शिव जाग जाएगा।
एक घंटा पहले
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