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रोज़ अहसान गिनाया मत कर

Mahi Jaipuri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोज़ अहसान गिनाया मत कर
        
                                                    
                            
ऐसे मेयार गिराया मत कर

गर हवाओं से निभाना है रब्त
तो चराग़ों को जलाया मत कर

कर्ज़ रो रो के चुकाना पड़ जाए
ज़िन्दगी इतना हँसाया मत कर

तुझसे छोड़ी नहीं जाती है नींद
ख़्वाब आँखों में सजाया मत कर

साथ देती नहीं दुनिया 'कुलदीप'
झूठी उम्मीद लगाया मत कर
-कुलदीप
एक महीने पहले
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