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अल्फ़ाज हैं मेरे..

Mahesh Garg

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अल्फ़ाज हैं मेरे इन्हें मै कैसे छुपाऊ ,
        
                                                    
                            
एक छोटी बहन है मेरी उसे कैसे समझाऊं ।
उसे पता नहीं लोगों का ये कैसे दिखाऊं,
वो भोली भाली है उसे कैसे बताऊ।
जिनको जानना है उसे वो जानकर वी अनजान है,
ओर अपनी बातों में खुद को ढूंढ ढूंढ कर परेशान है ।
ना समझ है वो अभी सबको अपने जैसा है महसूस करे ,
नादान है वो अभी उसकी नादानी ही ऐसा करने पर उसे मजबूर करे ।
गुम-सुम सी रहती हैं इसलिए हर किसी को अपनी बातें नहीं कहतीं ,
अपनी बातों को मनवाती है समझाती हैं ओर सच साबित कर चली जाती है।
छोटों सी बच्ची है ओर बातें बड़ी बड़ी कर जाती हैं,
पता नहीं कब क्या कर जाती हैं।
उसमें एक डर सा देखा है ,
सहमीं सी रहती है ओर भयभीत कर जाती है ।
मेरी हर छोटी बातें को सच कर दिखलाने का बोल के चली जाती हैं,
वो बहन है मेरी अपना सपना सच कर दिखना चाहती हैं ।

 
2 महीने पहले
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