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सीमा का पहरेदार

mahesh balpande

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बर्फ गिरे या धूप तपी हो,
        
                                                    
                            
बॉर्डर पर वो खड़ा मिले।
सीने पर गोली खाए फिर भी,
तिरंगे को झुकने न दे॥

घर में माँ दीप जलाती है,
बीवी चूड़ी खनकाती है।
बच्चा पूछे "पापा कब आएंँगे"
पर वो सीमा पर डटा रहे॥

दुश्मन की हर साजिश पर,
उसकी नज़र पहरा देती है।
एक इंच जमीन की खातिर,
वो जान हथेली पर लेता है॥

त्यौहार आए तो वो याद करे,
घर का आँगन सूना लगे।
पर कर्तव्य की वर्दी पहनकर,
वो अपने आँसू पी लेता है॥

नाम नहीं अखबारों में,
ना कोई बड़ा इनाम मिले।
फिर भी "वंदे मातरम" कहकर,
वो सरहद पर शहीद हो जाता है॥

याद रखो ऐ देशवासियों,
तुम्हारी नींद का रखवाला है वो।
जिसके लहू से सींची माटी,
उसी से ये तिरंगा लहराता है॥

 
2 महीने पहले
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