विज्ञापन

ईश्वर की चेतावनी

MAHENDRA SINGH

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पुरुष में पशुता देखी, नारी में नीचता!
        
                                                    
                            
हद कर दी रे मानव— देख तेरी ये क्रूरता।
एक पल ठहरकर ईश्वर ने सोचा— क्या कर दिया मैंने,
बनाकर इंसान तुझे? बुद्धि दी, विवेक दिया,
बल दिया, सामर्थ्य दिया, फिर क्यों अपने ही कर्मों से
तूने मानवता को खो दिया? भाई से भाई दूर हुआ,
पुत्र ने पिता को भुलाया, जिसे रक्षक बनने भेजा था,
उसी ने विश्वास लुटाया। धोखे, फरेब और स्वार्थ ने
संसार को घेर लिया, भय की छाया में मानव ने
जीते-जी खुद को ढेर किया। रखना याद— मैं ही शिव, मैं ही विष्णु, मैं ही ब्रह्मा, मैं ही पालनहार। जिस मिट्टी से तुझे बनाया,
उसी पर क्यों करता है अभिमान? भूल गया क्या
जल-प्रलय की वह विनाशलीला? क्षण भर में मिट जाता है
साम्राज्य, वैभव और अहंकार। यह मेरी अंतिम चेतावनी है,
अभी भी समय है— सुधर जा, समझ जा, विचार कर।
अपने कर्मों पर पश्चात्ताप कर, स्वार्थ छोड़, मानवता को चुन।
अहंकार छोड़, विनम्रता को चुन। घृणा छोड़, प्रेम को चुन।
और सबसे पहले— अपने भीतर के इंसान को बचा।
क्योंकि आने वाला कल, तेरा होगा या नहीं—
इसका उत्तर अब तुझे अपने कर्मों से देना है।
मैंने तुझे इंसान बनाया था, अब यह चेतावनी है—
क्या तू सच में इंसान बनकर रहेगा?
“या बनना होगा भक्षक मुझे।”
17 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile