एक छोटी-सी, पतली-सी धारा,
जब अनगिनत धाराओं में मिलती है,
तब जन्म लेती है एक नदी।
वही नदी
अपने प्रचंड वेग में
बड़े-बड़े साम्राज्यों को बहा ले जाती है।
पीछे छोड़ जाती है
एक उपजाऊ धरती,
जिसकी गोद में
नई पीढ़ियाँ
अपनी सभ्यता के बीज बोती हैं।