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मैं तो ऐसे ही जी लुंगा।

LS Kuntal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परवाह नहीं है मेरा सुत, मुझको वो कितना मानेगा,
        
                                                    
                            
हूं तात भले किस रूप में वो, मुझको कब कितना जानेगा।
बस कर्म मेरा है, करता हूं, फल की आशा अब है ही नहीं,
दुनिया की इस भीड़ में वो, क्या पता कहाँ पहचानेगा।।

मैंने उसको पाला-पोसा और वो बड़ा हुआ है मेरे सम,
वो योग्य हुआ बलशाली है, अब नहीं किसी से वो है कम।
मैं नहीं कहूंगा उसको ये, तुझको लाडो से पाला है,
लेकिन चाहूंगा उसका भला, जब तक हैं दुनिया में हम।।

उसने मुझको समझा ही दिया, जब-जब था उसको समझाया,
उसको तो वो सब आ ही गया जो मुझको ना अब तक आया।
मैं मूर्ख हूं वो है निपुण बहुत, उसने तो यही जताया है,
वो पाए सब कुछ चाह यही, जो मैंने अब तक ना पाया।।

अब ना उससे उम्मीद बहुत, मैं तो ऐसे ही जी लुंगा।
उसकी वाणी के ज़हर भरे कड़वे घूंटों को पी लुंगा।
मुझको आदत है सहने की, अपमानों की अपनों से ही,
इन घायल दिल के टुकड़ों को, चुपके- चुपके ही सी लुंगा।

दुनिया भर के ही पशु - पक्षी, इस जग में बच्चे पाल रहे।
कुछ तो हद तक श्रम करते है, कुछ जां जोखिम में डाल रहे।
मैं तो उनके सम्मुख ही नहीं, चाहे कितना भी यत्न किया,
बस प्रभु से मेरी बिनती है, चंगा हर माँ का लाल रहे।
एक घंटा पहले
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