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चलता जाऊंगा।

LS Kuntal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नहीं थकूंगा नहीं रुकूंगा, चलता जाऊंगा।
        
                                                    
                            
हारूंगा मैं नहीं, समय से लड़ता जाऊंगा।
मुझको बार-बार किस्मत ने खूब सताया है।
असफलता का स्वाद हमेशा मुझे चखाया है।
जब - जब की कोशिश है मैंने, कोई काम किया,
तब-तब मेहनत का फल मुझको दिलाया है।
ये क्या समझे इसी तरह क्या मैं झुक जाऊंगा?
नहीं थकूंगा नहीं रुकूंगा, चलता जाऊंगा।
हारूंगा मैं नहीं समय से लड़ता जाऊंगा।।१।।

जब फूलों पर हाथ बढ़ाया, कांटे ही हैं आए।
जब हीरे पाने को निकला, पत्थर ही हैं पाए।
जब सोने को पाना चाहा, तब ही मिट्टी पायी,
जब स्वर्णिम पल की आशा की, काले ही थे साए।
फिर भी सुमन हँसी के ही, मैं तो बिखराऊंगा।।
नहीं थकूंगा नहीं रुकूंगा, चलता जाऊंगा।
हारूंगा मैं नहीं, समय से लड़ता जाऊंगा।२।।

मैंने कर्म किये बहुतेरे, फल तो शून्य रहा है।
मैं हर प्रयास सफलता का तो, जाने कहाँ बहा है।
बार-बार गिरकर भी संभला हूँ मैं निज जीवन में,
दुख, असफलता, बर्बादी सब मैंने खूब सहा है।।
फिर भी मन में दृढ़ता है मैं सब कुछ पाऊंगा।।
नहीं थकूंगा नहीं रुकूंगा, चलता जाऊंगा।
हारूंगा मैं नहीं, समय से लड़ता जाऊंगा।३।।

खोया मैंने बहुत यहाँ, बस थोड़ा पाया है।
अच्छे अवसर, किस्मत जाने, कौन भुलाया है।
मैंने तो अच्छा सोचा, सबके संग कर डाला,
गैरों ने क्या अपनों ने भी, लाभ उठाया है।
फिर भी प्रण है परहित का मैं सदा निभाऊंगा।।
नहीं थकूंगा नहीं रुकूंगा, चलता जाऊंगा।
हारूंगा मैं नहीं, समय से लड़ता जाऊंगा।४।।

कोई रहे, रहे ना जग में, बन कर मेरा अपना,
बस मेरा भोला अपना हो, सदा यही है सपना।
आएंगे जाएंगे सब ही, आम यही श्रष्टि में,
लेकिन भूल नहीं जाऊं, मैं नाम प्रभु का जपना।
निज कर्मों संग गीत प्रभु के, मैं तो गाऊंगा।।
नहीं थकूँगा नहीं रुकूंगा, चलता जाऊंगा।
हारूंगा मैं नहीं, समय से लड़ता जाऊंगा।५।।
2 घंटे पहले
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Shivam Awasthi

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