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खामोश लव

ललित दास "निर्मोही"

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिसको चाहा था दिल से ख़ुदा की तरह,
        
                                                    
                            
वो जुदा हो गया इक सज़ा की तरह।
हम लुटाते रहे जिनपे अपनी हँसी,
दे गए उम्र भर की हमें बेबसी।
रो पड़ा टूट कर ललित दास निर्मोही,
दर्द ऐसा मिला ना रहा अपना कोई।
साँस तो चल रही है मगर मर गए,
जीते-जी वो हमें ही दफ़न कर गए।
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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