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खामोश लव

                
                                                         
                            जिसको चाहा था दिल से ख़ुदा की तरह,
                                                                 
                            
वो जुदा हो गया इक सज़ा की तरह।
हम लुटाते रहे जिनपे अपनी हँसी,
दे गए उम्र भर की हमें बेबसी।
रो पड़ा टूट कर ललित दास निर्मोही,
दर्द ऐसा मिला ना रहा अपना कोई।
साँस तो चल रही है मगर मर गए,
जीते-जी वो हमें ही दफ़न कर गए।
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2 घंटे पहले

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