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बंधन खाकी का

ललित कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो बचपन वाला राखी का त्यौहार
        
                                                    
                            
इस जवानी में कन्ही खो गया

पैसे न थे बहन को देने लिए
लेकिन
जो प्यार था उन छोटे छोटे झगड़ो में
उससे भी दूर हो गया

आज लगा कमाने पैसे
तो
राखी के लिए भी मोहताज हो गया

न रहे सूनी कलाई मेरी
इसलिए
रक्षाबंधन से पहले ही कलाई पर राखी
और माथे पर तिलक लग गया

औरौ की कलाई पर राखी बंध सके
इसलिए
पहन वर्दी मैं सुरक्षा के लिए तैयार हो गया

होकर भावुक कभी कभी मैं भी राे दिया
जबसे
वो बहन की सुरक्षा का बंधन तोड़
खाकी पहन सबका पहरेदार हो गया

ड्यूटी करते करते मन उदास हो गया
खाकी के बंधन से
राखी से कितना दूर हो गया

सहसा
एक अजनबी बहन ने आकर
कलाई पर राखी बांध दी
मुंह भी मीठा हो गया
और मेरा भी भ्रम दूर हो गया

खुश हूं ये सोच कर
एक न सही दो न सही
अब में हजारों बहनों का भाई हो गया

मैं घर न गया
तो क्या हुआ
मेरी वजह से
सभी बहनों का त्यौहार हो गया ।
- ललित कुमा
एक महीने पहले
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