विज्ञापन

लखनऊ कोचिंग सेंटर की आग

Lata dubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर आँख में... सुनहरे कल के... सपनों का संसार था...
        
                                                    
                            
माँ की दुआएँ... पिता की उम्मीदें...
हर दिल में... एक उजला ख़्वाब था...
जलती दीवारें... पूछ रही हैं...
क्यों लापरवाही इतनी भारी पड़ी...
क्यों सुरक्षा की साँसें... थम-सी गईं...
क्यों ज़िंदगी यूँ हार गई...
ना कोई धर्म... ना कोई जात...
हर माँ की कोख... उजड़ी एक साथ...
आँसू कहते हैं... बस एक बात...
अब ना दोहराए... ऐसा आघात... 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

771 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10784 कविताएं

View Profile