विज्ञापन

जबलपुर क्रूज त्रासदी

Lara Upadhyay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "जबलपुर क्रूज त्रासदी "
        
                                                    
                            

शांत बहती जो सदियों से, वो लहर अचानक डोल गई
नर्मदा की वो शांत लहरे, गहरा राज अपना खोल गई
मौसम विभाग ने दी चेतावनी, तूफान हवा में भारी था
पर इंसानों की लापरवाही का, अंजाम सब पर भारी था

डोला क्रूज, कांपी सांसे सबकी , सन्नाटे का माहौल हुआ
क्षण भर में ही खुशियों का सारा, दृश्य बड़ा लाचार हुआ
माँ नें अपने लाल को लेकर,सीने से अपने चिपका डाला
लाल को अपने बचाने हेतु, माँनें जीवन अपना दे डाला

सागर रोयां, तट रोयां, रोयां नभ का हर चमकीला तारा
मध्यप्रदेश का कण-कण रोयां, अब रोयां भारत देश सारा
ममता रोई, रिश्ते रोए , रोयां अब हर एक विश्वास वहां
मानुष की इस गलती नें, रचा त्रासदी का इतिहास वहां

किसी के घर का दीपक बुझा, किसी आँगन की शान गई
किसी माँ की आँखों का तारा , उसकी नन्ही-सी जान गई
किसी बहन की राखी डूबी, किसी पत्नी का मांग सिंदूर
रिश्तों के प्यारे हर एक बंधन का, डूब गया हर संसार

कैसे बयां करुँ अपने शब्दों में, शौक के इस मातम को
हंसते खेलते इन परिवारों के, बुझे हर एक दीपक को
श्रद्धा सुमन अर्पित कर, भाव श्रद्धांजलि उनको देती हूँ
नमन मेरा पहुंचे उन तक, प्रार्थना ऐसी मैं प्रभु से करती हूँ
- लारा उपाध्याय
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile