मनुष्य जो भी सोचता है,
ये कर्म का संकेत है,
चाहे वर्तमान में घटित हो,
चाहे भूतकाल की अपरिचित घटना,
चाहे भविष्य में होने वाली,
पर मनुष्य के भीतर आए विचार,
कर्म बनते हैं।।
- ललित दाधीच