विज्ञापन

"ईगो "

Lakshman Jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लोग आजकल
        
                                                    
                            
मुझसे किनारा करने लगे हैं,
मेरी भंगिमाओं को देखकर
मुझे नज़रअंदाज़ करने लगे हैं।
पहले मेरी आरती उतारी जाती थी,
फूल-मालाओं से मेरी आकृति सजाई जाती थी,
लोग मुझे हरफ़नमौला कहते थकते न थे।
मंच पर जब कुछ बोलता था,
सब सुनकर तालियाँ बजाया करते थे,
मेरे बेसुरे गाने पर भी
तालियाँ बजाते थे।
क्या करूँ,
मैं भी मदमस्त हाथी की तरह चलने लगा,
आँखों पर चर्बी छाने लगी।
मैं किसी को पहचानने से
इनकार करने लगा,
अकर्मण्यता का लिहाफ़
ओढ़ने लगा।
धीरे-धीरे सब लोग
मुझसे दूर जाने लगे,
रंग बदला, रूप बदला,
लोगों को अपना बनाने के लिए
'आ' का सहारा लिया,
आवाज़ बदल डाली,
चाल बदल डाली।
कभी 'सदमा' फ़िल्म का
कमल हासन बना,
'मेरा नाम जोकर' के अंदाज़ में
लोगों को हँसाना चाहा।
जब कोई काम न आया,
तब अपनी पहचान
और हस्ती बदल डाली,
और फिर नई राहों पर
चलना स्वीकार किया।
-लक्ष्मण झा परिमल
 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pradeep Kairana

2 कविताएं

View Profile

manoj tandon

22 कविताएं

View Profile